“आधुनिकता के आड़ में प्रकृति के संग खेलवाड़”

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आभा झा।                           

अपन शास्त्र में गाछ लगेनाइ पुण्य के काज कहल गेल अछि। एकटा गाछ लगेनाइ एक यज्ञ के बराबर अछि। गाछक प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष लाभ के देखैत ओकर संरक्षण केनाइ हमर सबहक कर्तव्य अछि। जनसंख्या,
आधुनिकता और शहरीकरण के चलते गाछक अंधाधुंध कटाई भेल जा रहल अछि,जेकर परिणाम हमरा सबके देखय लेल भेट रहल अछि। पृथ्वीक तापमान लगातार बढ़ि रहल अछि आर वातावरण सेहो दूषित भऽ रहल अछि। जगह-जगह इमारत तऽ बनिते अछि मुदा नब गाछ नहिं लगायल जा रहल अछि। गाछ समाजक बहुमूल्य हिस्सा अछि। गामक गाछक हरयाली मोन के मोहि लैत छल। गाछ हमरा सबके स्वच्छ हवा,भोजन केवल नहिं प्रदान करैत अछि बल्कि धार्मिक तथा अध्यात्मिक भावना के दर्शाबैत अछि।
गाछक कटाई के कारण ग्लोबल वार्मिंग जेकां जटिल समस्या उत्पन्न भऽ रहल अछि। पृथ्वीक तापमान बढ़ला के कारण ग्लेशियर पिघलनाइ शुरू भऽ गेल आर शांत पड़ल ज्वालामुखी सेहो सक्रिय भऽ रहल अछि,जाहि सँ विषैला गैस निकलैत अछि जे पृथ्वीक लेल हानिकारक अछि। वायुमंडलक ओजोन परत के सेहो काफी नुकसान भऽ रहल अछि जे कि चिंताजनक विषय अछि। प्राकृतिक संतुलन बिगड़ला के कारण धरती तथा जल रहि रहल कतेको जीव-जंतु विलुप्त भऽ रहल अछि और धरती विषैला भऽ रहल अछि।
अपन मिथिलांचल में सेहो सड़क तथा रेल मार्गक निर्माण लेल सेहो काफी मात्रा में गाछ काटल जा रहल अछि जकर नुकसान हमरा सबके आबै वाला किछ वर्ष तक झेलै पड़त। हम अपन आबै वाला नब पीढ़ी के प्रदूषणक सौगात दऽ रहल छी कियैकि हम वातावरण के शुद्ध करय वाला गाछ के अपन सुख-सुविधाक लेल काटि रहल छी। धरती पर जीवन और पर्यावरण के बचाबै के लेल हमरा सबके गाछ बचेनाइ जरूरी अछि।
1 – हमरा सबके गाछ काटै के कारण पता लगेबाक चाही। अगर कियो गाछ काटि रहल अछि तखन स्थानीय विभाग या शहरी विभाग के शिकायत करबाक चाही। ताकि ओ अपन तरीका सँ जाँच करि सकै।
2 – हमरा सबके ई सुनिश्चित करबाक चाही कि अगर कोनो जगह सँ गाछ के हटायल जा रहल अछि तखन ओकर बदला दोबारा ओतय गाछ लगेबाक चाही।
3 – गाछक महत्ता के बुझैत हमरा सबके जागरूकता फैलेबाक लेल समाजसेवी संस्थाक मदद लेबाक चाही।
4- सड़क,नदी तथा रेलमार्गक निर्माण में काटल जा रहल गाछक जगह नब गाछ लगेबाक लेल अपन आवाज उठेबाक चाही।
5- सरकारी तथा गैर सरकारी इमारतक खाली जगह पर गाछ लगेबाक चाही। पाँच जून कऽ पर्यावरण दिवसक अवसर पर नब गाछ लगेबाक चाही आर लोक में जागरूकता अनबाक चाही।
6 – हमरा सबके अपन नब पीढ़ी के सेहो अहि समस्या सँ अवगत करेबाक चाही ताकि ओहो अपन योगदान दऽ सकता।
7 – हमरा सबके गाछक खेती पर जोर देबाक चाही जाहि सँ पर्यावरण शुद्ध रहत और संग ही रोजगारक साधन सेहो भेटत।
8- चिपको आंदोलन एक पर्यावरण रक्षाक आंदोलन छल,जाहि में भारतक उत्तराखंड राज्य में (1970)किसान सब गाछक कटाई के विरोध में प्रदर्शन केने छल। गामक सब स्त्रीगण अहि आंदोलन में हिस्सा लेलनि और जंगल के काटइ सँ बचेने रहथि। अहि आंदोलन में सब गांववाला गाछक संग चिपकि गेल रहैथ तथा ओकरा काटइ सँ बचेने रहैथ। 1980 में अहि आंदोलन के सफलता भेटल तखन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पंद्रह वर्षक लेल हिमालय वनक कटाई पर रोक लगेने छलीह।
सब सँ आग्रह जे गाछक महत्ता के बुझय लेल हर एक नागरिक के गाछ जरूर लगेबाक चाही। गाछ हमर सबहक जीवनक अभिन्न अंग अछि। जहाँ रही गाम घर या शहर सब जगह अपन आस-पासक लोक के गाछ लगेबाक लेल प्रेरित करि।
वृक्षारोपण अछि प्रकृतिक मान,आउ गाछ लगा कऽ एकर करि सम्मान।

आभा झा
गाजियाबाद