“मिथिला में पागक महत्व”

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अखिलेश कुमार मिश्रा।                     
पाग शब्द आ पगड़ी शब्द दुनू एकरंगाह अछि। दुनूक काज एके। दुनू पुरुष द्वारा माथ पर धारण कैल जाइत अछि। दुनू शब्द में सँ पहिले केकर उत्पत्ति भेल से ज्ञात नै। पहिले के साठा पाग बिल्कुल पगड़ी ही छल। जाहि में सूती या रेशम के कपड़ा (शायद साठि हाथक, मतलब नब्बे फ़ीट) के द्वारा पगड़ी बान्हल जाइत छल जे कालांतर में पागक संक्षेप रूप में आबि गेल। चूँकि मैथिल सभ बड्ड स्थिर होइत छैथि तैं एहेन पागक निर्माण भेल। कियैक तs दुनियाँक आर कुनो पुरुष के माथ पर ई पाग नै टिकत, ई जरूर ससरि कs खसि पड़त।
पाग शब्दक दोसर अर्थ अछि जे चीनी अथवा गुड़ के सिरका में कुनो चीज पागनाई। जेना चिनीक सिरका मखान आदि के आवरण बनि जाइत आ नया मिठास पैदा करैत अछि ओहिना मैथिल सभ कें पाग पूर्ण आवरण बनि नया मिठास पैदा करैत अछि।
खैर पागक बनाबट आ निर्माण विधि के चर्चा आगा कड़ब। पहिले एक्कर की महत्व अछि ताहि सन्दर्भ में बात करी।
मिथिला में पाग के बड्ड महत्व देल गेल अछि। पाग मात्र पहिरबा ही नहि अपितु ई मान-सम्मान कें द्योतक अछि। पाग के अर्थे अछि मान। जेना कहल गेल जे हम्मर पागक लाज राखब, अर्थात हम्मर इज्जत राखब। मिथिला में जहिना कुलीन स्त्री द्वारा माथ पर साड़ी राखनाई इज्जत के बात अछि तहिना पुरुष के माथ पर पाग। माथ झाँपि कs राखनाई श्रेष्ठ अछि। कुनो उत्सव, त्योहार में पाग पहिरनाई शुभ मानल गेल अछि। सभ अवसर पर अलग अलग पाग धारण कैल जाइत अछि।
पागक बनाबट में में मुख्यतया कूट/गत्ता आ ताहि ऊपर पातर सूती या रेशम के कपड़ा के प्रयोग होइत अछि। लोक सभ पागक शोभा बढ़ाबs लेल ओहि में झालरि आ घुनेश कें प्रयोग सेहो करै छैथि। शभ सँ ऊपर जे समतल हिस्सा होइत अछि ओहि कें नीचा त्रिभुजाकार कूट होइत अछि जे त्रिफला (तीन फलक बाला) कहाइत अछि। जेखन ओ कपड़ा सँ सज्जित होइत अछि तs ओ हिस्सा चनबा कहाइत अछि। पागक अगिलका हिस्सा जाहि के निर्माण कपड़ा कें सिकोड़ी कs चुनन बनाओल जाइत आ पिछला हिस्सा बिल्कुल सीधा जे पेशानी भेल। अगिला लटक बाला हिस्सा मैथिल कें ललाट पर अलगे शोभा बढ़बैत अछि। ई मुख्य तया तीन रंग कें होइत अछि। लाल (डीप पिंक), पियर आ शुभ्र सफेद। लाल आ पियर पाग तs उपनयन आ विवाह में क्रमशः बरुआ आ वर द्वारा धारण कैल जाइत अछि सफेद रंग अन्य कुनो सामान्य दिन। ओना सफेद रंगक पाग विद्यार्थी आ बूढ़ सभ कें सुशोभित करै छैन्हि।
खैर पागक निर्माण में एक कमी अछि जे ई माथ कें हिल डुल केला खसि पड़ैत अछि। हम तs विवाह में अप्सियात भ गेल रही। समझ में ही नै आबै कि मंत्र पढू की पाग सम्हारु। खैर, विवाह तs भs गेल।😄 एक्जर बनाबट कनि बदलि एकरा बेसी स्थिर बनैल जा सकैत अछि।
पागक महत्व तs सांस्कृतिक अछिये। संगहि आब तs व्यापारिक महत्व सेहो बढ़ि गेल। एक्कर निर्माण आ व्यवसाय कतेक घर मे कुटीर उद्योग के रूप में प्रसरित अछि।
अहाँ सभ सँ आग्रह जे लेख पूरा पढि हम्मर पागक लाज राखब😄🙏