नारी

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#नारी

भारतीय संस्कृति में नारी के सम्मान के बहुत महत्व देल गेल छइ। संस्कृत में एकटा स्लोक अछि- यत्र नार्यस्तु पूज्यनते रमन्ते तत्र देवता। अर्थात जत नारी के पूजा होइत छइ ओत देवता वास करैत छैथ। नारी जन्म स मृत्यु तक अपन सब कर्तव्य निभबैत छैथ। ओ एक मां,पत्नी,बेटी,बहीन सब रिश्ता के दायित्व निष्ठा स पूरा करैत छैथ। जत नारी के देवी के रूप में पूजल जाइत अइछ,ओतय ओकरा कमजोर सेहो बुझल जाइत अछि।
नारी घर मे खुशहाली अनैत छैथ,आर घर के स्वच्छ बनबै लेल ओ भोरे-भोर उठी क साफ सफाई करैत छैथ जइ स की वातावरण स्वच्छ रहै आर हम अबै वाला बीमारी स बइच सकी इ सब नारी के कारण होइत अछि। नारी परिवारक हर सदस्य के बहुत ख्याल रखैत छैथ। नारी समाज में दु कुलक उद्धार करैत छैथ। समाज में हुनकर अपूर्व स्थान छैन। नारी के सहयोग के बिना समाज नही चइल सकत।
आजुक नारी जीवन के हर क्षेत्र में पुरूख के संगे कन्धा स कन्धा मिला क काज करै के क्षमता रखैत छैथ। शिक्षा,विज्ञान,राजनीति,धर्म,समाजसेवा आर सेना में सेहो आजुक नारी अपन प्रसंशनीय भूमिका निभा रहल छैथ। पेहने ग्रामीण क्षेत्र में नारी के शिक्षा पर ओतेक ध्यान नइ देल जाइत छल ।हम मां,दादी,नानी सब के सुनने छी की घर पर पढ़ैत छल। कहल जाइ छलेन की पइढ़ क की करती। पेहने बेटी के बेसी पढ़बै त बियाहक चिंता सेहो भ जाइ छेलेन।
आजुक नारी चाइर दीवारी स निकइल क अपन अधिकार के प्रति सजग छैथ। ओ शिक्षित भ क सब क्षेत्र में नीक प्रदर्शन क रहल छैथ। आइ हुनकर प्रतिभा आर दृष्टिकोण पुरूख स पाछु नइ छैन।
जीवनक रथ एक पहिया स नइ चलै छइ।गृहस्थी के गाड़ी नर आर नारी के सहयोग के बिना नइ बइढ़ सकैत अछि। समाज में नारी के बराबर के अधिकार भेटबाक चाही तखने समाज आगु बढ़त। दहेज प्रथा के कारण कतेक नारी के अपन जिंदगी समाप्त कर परैत अछि। आब पुरूख के सेहो अपन दृष्टिकोण बदल के चाही। नारी के कनिक प्रोत्साहन देला स हुनका में शक्ति,क्षमता,संकल्प,साहस,धैर्य जेकां गुण विकसित हेतेन। मुदा आइ काइल नारी के अपमान सेहो भ रहल अछि। नारी के भोगक वस्तु बुइझ पुरूख अपन तरीका स इस्तेमाल क रहल अछि। इ बड चिंताजनक अइछ। आब नारी के संग अभद्रता के पराकाष्ठा भ रहल अछि। रोज अखबार आर न्यूज चैनल में पढ़ैत आर देखैत छी की नारी के संग छेड़छाड़ आर बलात्कार कैल गेल। अही सबहक आबक नवतुरिया के मन मस्तिष्क पर खराब असर भ रहल अछि। नारी के सम्मान आर ओकर अस्मिता के रक्षा अही पर विचार केनाइ बड जरूरी अछि ।

  1. कलियुग में हर मोड़ पर रावण
    कोना क अपन लाज बचाउ
    प्रतिपल अपमानित अछि नारी
    ककरा अपन हाल सुनाउ
    नारी नही कखनो बेचारी
    नारी में नीहित अछि शक्ति सबटा
    जत होइत स्त्रीक अपमान
    अछि ओ स्थान नरक समान
    नारी सम्मान अछि,स्वर्गक द्वार
    ओकर अपमान अछि नरक समानआभा झा (गाजियाबाद)