लेखनी के धार प्रतियोगिता: पुरस्कृत लेख

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मिथिला में बहुत रास रीति-रिवाज होइ त अईछ जेना मुङन उपनयन और विवाह। मिथिलांचल में वैवाहिक रीति-रिवाज कनि अलग होइत अईछ। मैथिल दम्पति में जे प्रेम भाव होइत अईछ एक दोसर के प्रति जे सम्मान के भावना होइत अईछ से गौर करै बला बात अईछ।
विवाह पूर्व घटकैति औपचारिकता भेलाक बाद सिद्धांत नाम सॅ एकटा रिवाज अछि जाहि के विवाहक हेतु निश्चित रूप सॅ छेक देल जाएत छैक।
सबस पहीने वर जखन वधु के द्वार पर आबैत छैथ त वर के सब के समक्ष अपन वस्त्र बदल परैत छैन ताकि वर के कोनो शारीरिक दोष त नई छैन। तखन विधकरी द्वारा परिछन के दौरान हुनका स गृहस्थ जीवन के बारे में प्रश्न पुछल जाइत छैन।
फेर कोहबर में नैना जोगिन होइ छइ जाहि में पत्नी और साली के बिना देखने एक के चुनबाक रहैत छई। चाहे ओठंगर कूटनाई हो या भाई के साथ मिल क लावा छीटनाई ई सब रिवाज के पीछे कोनो ने कोनो व्यवहारिकता होइ छइ।
वधु के प्रथम सिंदूरदान अलग सिदूर स कइल जाइत अईछ। अहि विवाह के बाद वर वधु कोहबर में जाइत छैथ। कोहबर के चित्र द्वारा सजायल जाइत छई।
दुनियाक सर्वोत्तम वैवाहिक प्रकिया में सॅ एक मैथिल बाह्यण केर मानल जाई छइ। गोत्र आ मूल स शुरु होइत सिद्धांत लेखन विवाह चतुर्थी मधुश्रावनी कोजगरा द्विरागमन रीति-रिवाज के मिथिला में महत्व अईछ। मिथिलां के
सबस निक रिवाज पैर छूक प्रणाम केनाई अईछ। ऐखनो सासूर मे सर पर पल्लू रखई के रिवाज अईछ।

   आभा झा