मिथिलाक दाय-माय आ जीतिया पाबनिक महोत्सव मे परिणति गाथा

जीतिया पाबनि पर मनाओल जा रहल उत्सव सँ जागरुकता पसैर रहल अछि मिथिलानी महिला समाज मे
 
अत्यन्त शुभ आ सुखद समाचार ई अछि जे पर्दा आ घोघ मे नुकायल मिथिलानी लोकनि आब हरेक क्षेत्र मे अपन सबल सहभागिता नेपालक मिथिलाक्षेत्र मे देखायब शुरू कय देने छथि। भारतीय मिथिला मे एखनहुँ धरि पोंगापंथी आ पिंगलपंथी मे ओहि ठामक बड़बोला पुरुष समाजक ओछ विचार आ पिछड़ापण केर कारण कोनो तरहक प्रगति देखय मे नहि आयल अछि जे एक तरहक पैघ कमजोरी थिक। निश्चित, ओतय राजनीति मे आरक्षण आ सुरक्षित सीट भेटबाक कारण नाम लेल पद पर निर्वाचित-चयनित-मनोनीत तऽ होइत छथि, मुदा काज हुनकर बदला हुनक पति वा पुरुष-परिजन करैत छथि – जेकरा लेल एकटा नव शब्द सेहो शब्दकोश मे जुड़ि गेल अछि “मुखियापति”। हास्यास्पद कही या बौद्धिक पिछड़ापण या फेर परम्परावादक चपेटा, परञ्च महिला समाज केँ जाहि तरहें अपन नव भूमिका केँ बुझबाक चाहियनि ताहि मे ओ सब ओहि पार पिछड़ल छथि।
 
नेपाल मे राजनीतिक क्रान्ति हालहि करीब तीन दशक सँ चरम पर रहल, कतेको तरहक परिवर्तन देखलक, बहुदल प्रजातांत्रिक राजतंत्र, पुनः राजाक मुख्य संरक्षण मे मनोनीत मंत्रीमंडल, माओवादी जनयुद्ध, प्रजातांत्रिक आन्दोलन १ एवं २, माओवादी लड़ाकू एवं विभिन्न सशस्त्र आन्दोलनी संग शान्ति समझौता, नव संविधान बनेबाक लेल सहमति, राजतंत्र केँ समाप्त करबाक घोषणा, लोकतांत्रिक गणतंत्रक स्थापना, मधेस आन्दोलन कइएक चरण मे, मिथिला राज्य आन्दोलन आ शहादति, महिला तथा उपेक्षित समुदाय सहित सम्पूर्ण समावेशी प्रतिनिधित्वक गारंटी करैत तीनू तह केर चुनाव आ ताहि सँ चुनल जनप्रतिनिधि द्वारा वर्तमान सत्ता-संचालन…. एकटा युग केर दर्शन करौलक अछि नेपालक हालक राजनीतिक परिवर्तन। आर एहि परिवर्तन मे मिथिलाक लोकमानस मे ‘मधेशी’ कहाइत राज्य द्वारा उपेक्षित रखबाक – दोसर दर्जाक नागरिक जेकाँ व्यवहार करबाक शासकवर्गक रवैयाक विरुद्ध एक तरहक कठोर संघर्ष लेल तत्परता सँ महिला लोकनि सड़क, सदन, समाज, सतही हरेक पटल पर आगू छथि। ई मिथिला लेल, मधेश लेल, समग्र राष्ट्र आ मानव सभ्यता लेल शुभ संकेत कहि सकैत छी।
 
जनकपुर मे राजपा महिला नेत्री लोकनि द्वारा जीतिया उत्सवक समाचार –
 
मैथिली कवियित्री संग-संग महिला समाजसेवी एवं राजनीतिकर्मी – राष्ट्रीय जनता पार्टी नेपाल केर सक्रिय महिला नेत्री श्रीमती पुनम झा मैथिलक फेसबुक स्टेटस कहैत अछि –
 
“जितिया पावनि के शुभ दिन (नहाय खाय) खरीतेल चढाय आ चुडा दही अपना पित्तर के समर्पित कय महीला सब अपना धिया पुता के आेंगठन करबैत अछि आ अपनाे करैत अछि ।
 
रा ज पा महिला संघ आई कबीर बाल आश्रम आ जानकी वृद्धा आश्रम के बच्चा आ वृद्ध संग आेंगठन कयल । आई जीवनक सब सँ सफल जितिया पावनि करबाक अनुभूति पाआेल ।”
 
सच मे, जीतिया पाबनि अछि बड़ भारी केर रहस्य राति मायक मुहें सुनि रहल छलहुँ। के छलाह जिमुतवाहन देव। केना ओ आशीर्वाद प्राप्त कयलनि आर केना ई कठिन व्रतधारण परम्परा अपन सन्तानक दीर्घायु प्राप्ति एवं कुशलताक लेल कयल जाइत अछि – ई सब बात माँ अत्यन्त सहज गमैया भाषा मे कहलक। आइ हमरो माँ व्रत रखने अछि। हम बेर-बेर ईश्वर सँ ओकर व्रतक सफलताक कामना त करिते छी, संगहि माय केर माया जे हमरा प्रति आ सब मायक अपन सन्तान प्रति होइत छैक ई बुझबाक लेल सब कियो निश्चित रूप सँ जिमुतवाहन भगवान् केर कथा-प्रसंग बुझी, मनन करी आ जीवन मे एकटा प्रण अवश्य ली – माय सँ पैघ संसारक कोनो पद नहि होइछ। नौ मास पेट मे राखब, प्रसव पीड़ा झेलब, जन्म देब, अपन खून सँ तैयार भेल मायक दुध सँ बच्चाक लालन-पालन करब, ओकरा सब शिक्षा आ संस्कार सीखायब, आर पुनः एहि धराधाम मे मनुष्यक पीढी-दर-पीढी चलैत रहबाक अत्यन्त आवश्यक कार्य मे अपन योगदान दैत पृथ्वी-वसुंधरा केँ एकटा सक्षम नेतृत्वकर्ता देबाक काज पर्यन्त करैत सब दिन जीतिया, छठि आदि अनेकों कठिन व्रतपालन करैत एहि लोक सँ परलोक धरि ओ सिर्फ सन्तान-पति आदि लेल प्रार्थना करैत रहैत अछि…. माय जियैत देवता थिक – ई बात हृदयंगम् जरूर करय जायब।
 
आइ, जेना-जेना समय भेटत, तेना-तेना जानकारी देब जे आजुक नारी शक्ति अपन मिथिलाक मिथिलानी लोकनि कोना जीतियो महोत्सव केर नाम पर एक सँ बढिकय एक कीर्तिमान् स्थापित कय रहली अछि। परिचय करायब एक खास आ विशिष्ट महिला सँ जिनकर योगदान सँ आइ ७ वर्ष मे हम जीतिया महोत्सव लोकोत्सव बनैत देखलियैक अछि। काल्हि सँ मैथिली जिन्दाबाद पर विभिन्न समाचार दैत आबि रहल छी। अबैत छी पुनः….
 
हरिः हरः!!