मोदीजी केर मैथिली-मिथिला कनेक्सनः कि सब सिखबाक अवसर भेटल

विशेष सम्पादकीय

भारतीय प्रधानमंत्री अपन कार्यकाल मे तेसर बेर नेपाल भ्रमण मिथिलाक सांस्कृतिक राजधानी जनकपुर सँ आरम्भ कयलनि

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जहिना हिन्दुस्तान एहेन महान राष्ट्र केर मुखिया छथि, तहिना एतुका बहुभाषा, बहुधर्म, बहुसंस्कृति, बहुरूपता केँ हृदय सँ एतेक सम्मान दैत छथि तेकर परिचय हुनकर देश-विदेश मे आयोजित जनसभा मे राखल गेल संबोधन सँ स्पष्ट रहैत अछि। जहिना हिन्दुस्तानक हृदय विशाल तहिना एतुका प्रधानमंत्रीक हृदय विशाल – ई बात नरेन्द्र मोदीजीक लोकप्रियता आ जन-जन केर कंठ मे “मोदी-मोदी” केर नारा स्वस्फूर्त समा देलक अछि। भारतक मित्रराष्ट्र नेपाल आ साझा भाषा ओ संस्कृतिक फुलबारी हिमालयक कोरा मे अवस्थित ई बेहतरीन प्राकृतिक सुन्दरताक देश मे अवस्थित मिथिलाक सांस्कृतिक राजधानी “जनकपुर” मे सेहो भारतीय प्रधानमंत्री अपन नागरिक अभिनन्दन लेल आयोजित जनसभा केँ संबोधित करैत स्पष्ट रूप सँ देखौलनि।

“जगतजननी माँ जानकी के पवित्र भूमि, गौरवशाली इतिहास भेल मिथिलाक सांस्कृतिक राजधानी ई जनकपुरधाम मे हमरा नोत दऽ के बजेलहुँ आ ई सम्मान देलहुँ एकरा लेल हम सम्पूर्ण मिथिलावासी, जनकपुरवासी आ प्रदेश नंबर २ के सम्पूर्ण जनता के नमन करैत हार्दिक आभार व्यक्त करैत छी।

पग पग पोखरि माछ मखान, 
सरस बोल मुस्की मुख पान,
विद्या वैभव शान्ति प्रतीक
सरस क्षेत्र मिथिलांचल थिक!”

– नरेन्द्र मोदी

जनकपुरधाम केर जनसभा केँ संबोधित करैत मैथिली मे बजलाह। हुनक बजबाक टोन आ शैली मे कतहु कोनो लटपट आ घचपच नहि रहनि। स्वयं मिथिला-मधेसक कतेको वासिन्दा अपनहि भाषा बाजय मे लटपटा जाएत छथि। अपन त अवस्था एहेन अछि जे अपनहि भाषा बाजय मे कतेको केँ लाज लगैत छन्हि। एकर किछु प्रमाण स्वयं मोदीजीक नागरिक अभिनन्दन समारोह मे गोटेक वक्ता अपन वक्तव्य मे आखिर ई सिद्ध कइये देलाह जे मैथिलीभाषी रहितो हुनका लोकनि केँ मैथिली बाजय मे संकोच होएत छन्हि, ओ सब ई भान रखैत हिन्दी मे बजलाह जे आगन्तुक अति विशिष्ट अतिथि भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीजी हिन्दी मे बेसी नीक सँ सब बात बुझताह। कहैत चली, मोदीजी मैथिली हमरा-अहाँ सँ बेसी नीक बाजि सकैत छथि, बुझब त हिनका लेल दायाँ-बायाँक खेल छल।

नरेन्द्र मोदीजी केँ मैथिली सँ लगाव पर ओ अपन एक टीवी साक्षात्कार मे २०१४ मे स्पष्ट कहने छथि। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ केर प्रचारक तथा अन्य जिम्मेवारी पूरा करबाक समय हुनका संग रहनिहार एक पर्सनल स्टाफ मैथिलीभाषी छलाह। मोदीजी बेसीकाल हुनका संग मैथिली मे बात करथि, कारण गुजराती आ मैथिली भाषा केर सामीप्यता छैक। जहिना मैथिली मे ‘छी’ वा ‘अछि’ शब्द केर प्रयोग करैत वाक्यक अन्त कयल जाएछ ठीक तहिना गुजराती मे ‘छे’ केर प्रयोग कयल जाएत छैक। हिसाब सँ देखल जाय तऽ नेपाली खस भाषा सेहो मैथिली संग तहिना सामीप्यता रखैत अछि। मोदीजी काल्हिक भाषण मे नेपाली मे बजैत बड़ा सहजता सँ कहलनि “मेरो यस पटक को नेपाल भ्रमण प्रधानमंत्री को रूपमा कम तर प्रधानतीर्थयात्री को रूपमा रहने छ” – जे एहि बेर भारतक प्रधानमंत्री कम प्रधानतीर्थयात्रीक रूप मे रहत।

मिथिलाक तुलसी केर चर्चा समस्त भारतरूपी आंगन केर पावनता, शुचिता आ मर्यादाक सुगंध भरबाक आख्यान सुनिकय सभा मे उपस्थित या हुनकर ई लाइव (सजीव) भाषण सुनि रहल हरेक मिथिलावासीक मोन मे राज करब आरम्भ कय देलनि। नेपाल आर भारतक बीच मिथिला केहेन मूल्यवान सेतुक काज कय रहल अछि तेकर अनेकों स्वरूप एक माँजल साहित्यकार जेकाँ लयबद्ध सुर मे मोदीजी करैत रहला आ आह्लादित जनता बेर-बेर आनन्द सँ सराबोर होइत मोदी-मोदी चित्कार करैत रहला।

मोदीजीक मैथिली-मिथिला कनेक्सन केर प्रखरता हुनकर विचार सँ स्पष्ट अछि। एहि सँ पूर्व राष्ट्रीय राजनीति मे मिथिला क्षेत्रक भ्रमण पर ओ कतेक भावना रखलनि, तेकर संग्रह चुनावी राजनीति केर कारण लोक भने नहि केलक, नहिये भारतीय संचार माध्यम लेल कोनो फोकस लाइन बनि सकल… लेकिन काल्हि अन्तर्राष्ट्रीय भ्रमण मे जाहि तरहें ओ मिथिलाक महत्ताक संग-संग सीता केर महान् चरित्र सँ मानव आ मानवता केँ भेटल शिक्षा, राष्ट्र केँ भेटल मार्गदर्शन आ राजनीति केँ भेटल जनक-विदेहक चिन्तन आदि केँ ‘देवनीति’ केर बंधन तक केर उपमा दैत खुला कंठ सँ गान करैत रहलाह। मोदीजीक संबोधनक किछु वाक्यांश पर गर करूः

“मिथिलाक संस्‍कृति और साहित्‍य, मि‍थिलाक लोक कला, मिथिलाक स्‍वागत-सम्‍मान; सब किछु अद्भुत अछि। आर हम आइ अनुभव कय रहल छी, अहाँ सभक स्नेह केर अनुभव कय रहल छी, अहाँक आशीर्वाद केर एहसास भऽ रहल अछि। पूरे दुनिया मे मिथिला संस्‍कृति केर स्‍थान बहुत ऊपर अछि। कवि विद्यापति केर रचना सभ आइयो भारत और नेपाल मे समान रूप सँ महत्‍व रखैत अछि। हुनक शब्‍दक मिठास आइयो भारत और नेपाल – दुनूक साहित्‍य मे घुलल भेटैत अछि।

जनकपुरधाम आबिकय, अपने लोकनिक अपनापन देखिकय एना नहि लगैत अछि जे हम दोसर जगह पर पहुँचि गेल छी, सब किछु अपनहि जेकाँ, सब गोटे अपन जेकाँ, सब किछु मे अपनापन, ई सब अपनहि तऽ छी।”

कहय छय न जे भक्त जखनहि भगवान् केर साक्षात्कार करैत छथि त भगवानहि केर सदृश्य भऽ जाइत छथि। काल्हि मोदीजी जानकीजीक सोझाँ आबि पूर्णरूपेण जानकीक सदृश्य बनि गेल देखेलाह। नेपाल जेहेन मित्रराष्ट्रक गरिमाक बखान सेहो मिथिलाक गरिमागान सँ आरम्भ करैत कहलखिन –

“नेपाल अध्‍यात्‍म और दर्शन केर केंद्र रहल अछि। ई ओ पवित्र भूमि थिक – जतय लुम्बिनी अछि, ओ लुम्बिनी, जतय भगवान बुद्ध केर जन्‍म भेल छल। भूमि कन्‍या माता सीता ओहि मानवीय मूल्‍य, ओहि ऊसूल और ओहि परम्‍परा केर प्रतीक छथि जे हम दुनू राष्‍ट्र केँ एक-दोसर सँ जोड़ैत अछि। जनक केर नगरी सीता माता केर कारण स्‍त्री-चेतनाक गंगोत्री बनल अछि। सीता माता, यानी त्‍याग, तपस्‍या, समर्पण और संघर्ष केर मूर्ति। काठमांडू सँ कन्‍याकुमारी तक हम सब सीता माता केर परम्‍पराक वाहक छी। जतय धरि हुनकर महिमाक बात अछि तऽ हुनकर आराधक तँ समूचा संसार मे पसरल अछि।

ई ओ धरती थिक जे देखेलक कि बेटी केँ कोन तरहें सम्‍मान देल जाएत छैक। बेटी केँ सम्‍मान केर ई सीख आजुक सबसँ पैघ आवश्‍यकता थिक। नारी शक्ति केर हमर इतिहास और परम्‍परा केँ संजोगय मे सेहो एक बहुत पैघ भूमिका रहल अछि। आब जेना एतुका मिथिला पेंटिंग्स केँ, अगर एकरा देखब त एहि परम्‍परा केँ आगाँ बढ़ेबा मे सबसँ बेसी योगदान हमरा लोकनिक माता, बहिनक, महिला लोकनिक रहल अछि। और मिथिला केर यैह कला आइ पूरे विश्‍व मे प्रसिद्ध अछि। एहि कला मे सेहो हमरा सबकेँ प्रकृति केर, पर्यावरण केर चेतना हर खन नजरि अबैत अछि। आइ महिला सशक्तिकरण और जलवायु परिवर्तन केर चर्चाक बीच मिथिलाक दुनिया लेल ई बड पैघ संदेश थिक।

राजा जनक केर दरबार मे गार्गी जेहेन विदुषी और अष्‍टावक्र जेहेन विद्वान केर होयब ईहो साबित करैत अछि जे शासन केर संग-संग विद्वता और आध्‍यात्‍म केँ कतेक महत्‍व देल जाएत छल।

राजा जनक केर दरबार मे लोक कल्‍याणकारी नीति सभपर विद्वान लोकनिक बीच बहस होएत छल। राजा जनक स्‍वयं ओहि बहस मे सहभागी होएत छलाह। आर, ताहि मंथन सँ जे नतीजा निकलैत छल वैह प्रजाक हित मे, जनताक हित मे और देश केर हित मे ओ लागू करैत छलाह। राजा जनक केर लेल हुनकर प्रजा मात्र सब कुिछु रहनि। हुनका अपन परिवारक, सम्बन्धक, नाताक, केकरो सँ कोनो मतलब नहि छलन्हि। बस दिन-राति अपन प्रजाक चिन्‍ता करबाक बात केँ ओ अपन राज धर्म बना देने छलाह। तैँ त राजा जनक केँ विदेह सेहो कहल गेल छल। विदेह केर अर्थ होएत अछि जेकर अपन देह या अपन शरीर सँ पर्यन्त कोनो मतलब नहि हो आर सिर्फ जनहित मे स्वयं केँ खपा दैथ, लोक-कल्‍याण केर लेल अपना-आपकेँ समर्पित कय दियइ।

राजा जनक और जन-कल्‍याण केर एहि संदेश केँ लय केँ आइ नेपाल और भारत आगाँ बढ़ि रहल अछि। ….”

आगुओ मोदीजी अपन समस्त संबोधन मे रामचरितमानस आ जनक-जानकीक सन्देश सहित मिथिलाक अद्भुत शिक्षा आ संस्कार सँ ओतप्रोत बात कहिकय पूरे लाखों दर्शक-श्रोताक संग उपस्थित नेता केँ सन्देश दैत रहलाह।

मैथिली कला-संस्कृतिक चर्चा विश्व-स्तर पर होएत रहबाक बात कहलनि। एहि दिशा मे दुनू देश मिलिकय काज करत तँ आरो बेसी असर पड़तैक। – मोदीजी बड़ा स्पष्ट सन्देश संग ‘मैथिली फिल्म’ केर विशेष चर्चा कयलनि। दुइ राष्ट्रक बीच साझेदारीक लेल सझिया भाषा-संस्कृति आ कलाकर्म पर हुनकर फोकस स्पष्ट संकेत छल।

अपने लोकनि केँ ज्ञात होयत, मैथिली जिन्दाबाद सहित विभिन्न संचार क्षेत्र द्वारा नेपाली फिल्म ‘रज्जारानी’ केँ मैथिली मे पुनर्निर्माण आ जनस्तर पर रिलीज करैत निर्माता राजकुमार महतो इच्छा रखलनि जे ओ नेपालक अलावे एहि मैथिली फिल्म केँ भारत, कतार, दुबई, सउदी अरब आदि मे सेहो प्रदर्शन करता। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीक महानता देखू जे ओ एहि उत्कृष्ट उद्यमशीलता केँ खुलिकय सराहना करैत अपन संबोधन मे कहलनि –

“हमरा लोकनिक खानपान और बोलचाल मे बहुतेरास समानता अछि। मैथिली भाषीक संख्या जतबा भारत मे अछि, ओतबा एतय नेपाल मे सेहो छैक। मैथिली कला, संस्‍कृति और सभ्‍यता केर चर्चा विश्‍व स्‍तर पर होएत रहैत अछि। दुनू देश जखन मैथिलीक विकासक लेल मिलिकय सामूहिक प्रयास करत, तखन एहि भाषाक विकास और अधिक संभव होयब आसान भऽ जायत। हमरा पता चलल अछि कि किछु मैथिली फिल्‍म निर्माता आब नेपाल-भारत समेत कतर और दुबई मे सेहो एक्के संग नव मैथिली फिल्‍म रिलीज करय जा रहला अछि। ई एक स्‍वागत योग्‍य कदम थिक, एकरा बढ़ावा देबाक आवश्‍यकता छैक। जहिना एतय मैथिली बाजनिहारक काफी ज्‍यादा संख्‍या अछि, तहिना भारत मे नेपाली बाजयवलाक संख्‍या ज्‍यादा अछि। नेपाली भाषाक साहित्‍य केर अनुवाद केँ सेहो बढ़ावा देबाक प्रयास चलि रहल अछि। अहाँ सब केँ ईहो बता दी जे नेपाली भारतक ओहि भाषासूची मे शामिल अछि जेकरा भारतीय संविधान सँ मान्‍यता देल गेल छैक।”

हर तरहें, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपन मैथिली-मिथिला कनेक्सन सँ ओत-प्रोत रहि मित्रराष्ट्र नेपाल संग समृद्धिक मार्ग प्रशस्त करबाक वचनबद्धता प्रकट कयलनि। आब गेंद नेपालक कोर्ट मे छैक। १०० करोड़ केर सहयोगक प्रतिबद्धता मे पाँच टा ‘टी’ मे सँ ट्रेडिशन, टुरिज्म, ट्रेड, ट्रान्समिशन आदि क्षेत्र मे मैथिली भाषा-साहित्य-कला-फिल्म-संस्कृति सभक विकास लेल कोन-कोन परियोजना बनाकय समृद्धिक दिशा मे डेग बढबैत अछि, संगहि नरेन्द्र मोदीजी द्वारा इशारा-इशारा मे कहल बात जे नेपालक संघीय संविधान मे मैथिली भाषा केँ ससम्मान स्थान देबाक संग-संग मिथिला-मधेश मे राजकाजक भाषाक रूप मे एकरा कोना समेटैत अछि – ई सब बात एहि देशक राजनीतिक आका सभ ध्यान देता अपेक्षा करी।

एहि मिथिलाक भेलाह सल्हेस, आइयो छथि राजकुमार महतो जेकाँ कय गोट सल्हेस। जहिना पूर्व मे सल्हेस द्वारा मिथिलाक सीमा केँ वीरतापूर्वक रक्षा कयल गेल, गरीबी उन्मूलन लेल आ भूखल जनताक भूख मेटेबाक लेल कतेको तरहक योजना आनल गेल… तहिना वर्तमान मिथिलाक सामाजिक अभियन्ता लोकनि आ उद्यमी लोकनि तत्परता सँ अपन भाषा-संस्कृति केँ झगड़लगौना सभक झाँसा मे बिना फँसने आगू बढौता एहि लेल हम स्योर छी। अस्तु!

हरिः हरः!!