जखन भगवान् केँ मात्र एक्के परिवारक हेतु सँ ३-३ बेर अवतार लेबय पड़लन्हि

आध्यात्म भगवान् विष्णु केर ३ अवतार सिर्फ एक परिवार लेल साभारः दैनिक भास्कर   हालहि २८ अप्रैल केँ भगवनाम नृसिंह केर जन्मोत्सव भेलनि। भगवान विष्णु द्वारा हिरण्यकशिपु केर...

रामचरितमानस सँ सीख-५

स्वाध्याय १. रसगर हो वा अत्यन्त फीका - अपन कविता केकरा नहि नीक लगैत छैक! २. एहि संसार मे पोखरि आर नदी जेकाँ बेसी लोक भेटैत...

के छलाह महर्षि दधीचि – कियैक अमर भेल हिनक नाम

हिन्दू दर्शनक एक अविस्मरणीय पात्रः महर्षि दधीचि - अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी (मूल - भारतकोश) दधीचि प्राचीन काल केर परम तपस्वी और ख्यातिप्राप्त महर्षि छलाह। हुनकर पत्नीक...

गीताः काम आ क्रोध थीक मूल शत्रु – केकरो नहि छोड़ैत अछि

गीताक तेसर बेरुक स्वाध्याय (निरंतरता मे, गीताक तेसर अध्याय मे भगवान् कृष्ण द्वारा अर्जुन केँ कर्मयोगक व्याख्या करैत स्वधर्म केँ श्रेयस्कर होयबाक निर्णय सुनेनाय, स्वधर्म...

सृष्टि मे नीक-बेजा दुनू बातः अहाँक रुचि कि से अहींके हिसाब

स्वाध्याय केर महत्व सर्वविदित अछि, विगत किछु समय सँ रामचरितमानस मे महाकवि तुलसीदास द्वारा प्रयुक्त संस्कार - मंगलाचरण केर माध्यम सँ जेना व्यक्त कैल...

कलियुग मे राम नाम कल्पवृक्ष थिक – नामक महत्वः रामचरितमानस सँ सीख – १५

स्वाध्यायः रामचरितमानस सँ सीख - १५ आइ पंद्रहम भागक रामचरितमानस सँ सीख मे महाकवि तुलसीदास अति रमणीय उपमा सहित भगवान राम केर नामक प्रभाव कहलैन...

दुर्गा पूजाक पहिल दिन: आध्यात्मिक एवं लौकिक संकल्प हेतु कलशस्थापना

नवरात्राक शुभकामना: कलशस्थापनाक विशेष दिवस पर कलशस्थापनाक दिन आइ समस्त मैथिल एकताक कलश केर स्थापना करैत आपसी खण्डी-बुद्धिरूपी दानवक संहार केर संकल्प लैत आगामी समय...

विश्वमाता सीता का अद्भुत माहात्म्यः पं. रुद्रधर झा

विश्वमाता सीता का अद्भुत माहात्म्य - स्व. पं. रुद्रधर झा (अपनी पुस्तक 'गूढ तत्त्व समीक्षा' में) यद्यपि पृथ्वी की सर्वोत्तम भूमि मिथिला की पावनतम भूमि से...

रामचरितमानस केर सीख-१

स्वाध्याय आलेख मई २०, २०१७. मैथिली जिन्दाबाद!! महाकवि तुलसीदास रचित रामचरितमानस केर एक‍-एक पद सँ जीवनोपयोगी शिक्षा भेटैत अछि। आइ सँ ओहि शिक्षामृत केँ एतय विन्दुवार...

स्वधर्म केँ जुनि बिसरू मैथिल

श्रेयान् स्वधर्मो विगुण: परधर्मात् स्वनु्ष्ठितात्। स्वधर्मे निधनं श्रेय: परधर्मो भयावह:॥३५॥ अपन धर्म श्रेयस्कर होइत अछि। अनकर अति मनोरम व्यवहृत धर्मे सँ अपन अपूर्णो धर्म बेसी नीक...